Sunday, 3 April 2016

muhurt ki salakhe

मुहूर्त की सलाखें         डॉक्टर अरविन्द जैन  भोपाल
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 मुहूर्त का चस्का एक ऐसा चस्का हैं कि हर काम शुभ मुहूर्त पर करना चाहिए/ करना पड़ता हैं /या किया था .
 बच्चा /बच्ची का जन्म के समय का मुहूर्त उसकी ज़िंदगी भर की कुंडली बना देते  हैं  पंडित जी और दक्षिणा उत्तम मिलने पर कुंडली सर्वोत्तम बन जाती हैं.
एक दिन रामकिशोर जी रेलवे स्टेशन पर अपने रिश्तेदार को छोड़ने गए तो वहीं पर मनोज कि मुलाकात उनसे हो गयी .आपस में नमस्कार कर रामकिशोर जी अनायास मनोज से कह पड़े कि कोई सुयोग्य वर आपकी नज़र में हो तो बताए .
 मनोज ने लपक कर एक परिचित का सुयोग्य लड़का जो स्थानीय स्तर पर सी  ए  है  का ज़िक्र किया .इस पर रामकिशोर ने बताया कि पहले बात की थी , उनकी डिमांड अच्छी हैं और लड़की योग्य चाहिए .
मनोज ने कहा - अब फिर से बात बढ़ाओ ,हो सकता हैं कि वर्तमान में परिस्थिति बदल गयी हो और मुझे अधिक जानकारी नहीं हैं !
  कुछ दिनों के बाद मनोज को जानकारी मिली कि रमकिशोर की बच्ची का सम्बन्ध श्री राम  लाल  के पुत्र से होना निश्चित हुआ.
मनोज इस मामले से दूर और उनकी शादी में आमंत्रित .
शादी सानन्द सम्पन्न हुई और सब काम यथानुरूप  .पर प्रसनता का आभाव .
 एक दिन रामकिशोर जी मिलें और अपने आप कहने लगे कि मेरी बेटी के जन्म के समय का मुहूर्त न जाने कैसा रहा कि शादी होने के बाद लगभग एक माह के अंदर ही सम्बन्ध विच्छेद का कार्य सुनिश्चित .
 मनोज को मालूम था कि रामकिशोर जी प्रत्येक समय मुहूर्त , चौघड़िया , दिशा शूल का बहुत अच्छा ज्ञान रखते हैं और उन्होंने जितना भी विकास किया वह पूर्ण असफलता  का घोतक रहा .
 रामकिशोर जी ने पूरी सतर्कता से कुंडलियों का मिलान जलन कर शादी का मुहूर्त निकलवाकर शादी सम्पन्न कराई थी पर इस सम्बन्ध विच्छेद का होना भी उन्होंने अपनी कुंडली का दोष मानकर स्वीकारा पर पर लड़के वालों से श्री रामकिशोर जी ने मूल सहित शादी का खर्च , मई हरजानेके वसूला इस पर उन्होंने न चौघड़िया देखीं व न  शुभ मुहूर्त कारण उनको लक्ष्मी प्राप्ति का स्थान अपनी कुंडली में दिखा .
           लड़की की कुंडली से शादी व  पैसा  मिलना उनका अपना मुहूर्त , चौघड़िया ...............
                                                                                                                               डॉ अरविन्द जैन भोपाल